
गो आधारित जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लिए तैयार हुए मास्टर ट्रेनर, भीलवाड़ा प्रशिक्षण में पांढुर्णा-सौसर के युवाओं ने किया प्रतिनिधित्व,केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी एवं सांसद दामोदर अग्रवाल ने प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में गो आधारित जैविक एवं प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए पांच दिवसीय आवासीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 27 मई 2026 से 31 मई 2026 तक किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम श्रीरामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र कोटा, श्री सरोज देवी फाउंडेशन भीलवाड़ा, अमृता देवी पर्यावरण नागरिक संस्थान तथा अन्य संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सामाजिक संस्था युथ ऑफ सौसर एसोसिएशन के सदस्यों ने छिंदवाड़ा एवं पांढुर्णा जिले का प्रतिनिधित्व किया। कार्यक्रम में गोपाल कोठे, प्रशांत पाठे, नीरज दुबे, सुनीता पराडकर एवं राजेंद्र धारे ने सहभागिता की। प्रशिक्षण पूर्ण होने पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी (भारत सरकार) एवं भीलवाड़ा सांसद श्री दामोदर अग्रवाल द्वारा सभी प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर का प्रशस्ति प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य विषय स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर व्यवस्थाओं के साथ गो आधारित जैविक एवं प्राकृतिक खेती में बुवाई से लेकर बाजार तक के तकनीकी ज्ञान का विस्तार करते हुए मास्टर ट्रेनर तैयार करना था। प्रशिक्षण के दौरान व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र एवं प्रकृति के संबंध, वेद, पुराण, महाभारत, रामायण, वृक्षायुर्वेद, वृहत संहिता, कृषि पराशर, विश्व वल्लभ एवं लोकोपकार जैसे ग्रंथों में वर्णित गो आधारित खेती के विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
प्रशिक्षण में मेड़ मॉडल के माध्यम से वृक्षारोपण, बीज संरक्षण, संवर्धन, उत्पादन एवं वितरण, जल प्रबंधन, भूमि प्रबंधन, मृदा जांच, सुधार एवं पोषण, सुपोषण तकनीक, खाद निर्माण प्रक्रिया, चक्रीय, मिश्रित, अंतरा, बॉर्डर एवं ट्रैप फसल पद्धतियों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही गौ महत्व एवं ताजे गोबर पर आधारित अनुसंधानों की जानकारी भी साझा की गई।

खरपतवार प्रबंधन, कीट संरक्षण, संवर्धन एवं नियंत्रण, हिरण, खरगोश, नीलगाय, दीमक, सूअर एवं बंदरों से फसलों की सुरक्षा तथा रोग नियंत्रण की सरल तकनीकों पर भी विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन प्रदान किया। प्रतिभागियों को प्रमाणीकरण, दस्तावेजीकरण तथा कम लागत वाले कृषि यंत्र-उपकरणों की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम में देश के 17 राज्यों के 154 जिलों, 343 तहसीलों और 604 गांवों से कुल 1011 किसान सहभागी बने, जिनमें 73 महिला किसान भी शामिल थीं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन भीलवाड़ा विधायक श्री अशोक कुमार कोठारी, कलेक्टर श्री जसमीत सिंह संधू, आरसीएम के संस्थापक एवं डायरेक्टर श्री त्रिलोचन छाबड़ा तथा गोयल गौ अनुसंधान केंद्र कोटा के संस्थापक श्री ताराचंद गोयल की उपस्थिति में हुआ। वहीं समापन समारोह केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी एवं सांसद श्री दामोदर अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।
प्रतिभागियों के अनुसार यह केवल पांच दिवसीय प्रशिक्षण नहीं, बल्कि प्राकृतिक खेती की मुहिम से जुड़ने की एक नई शुरुआत है, जिसका उद्देश्य मृदा को पुनर्जीवित करना और किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ना है।
कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर में गो आधारित जैविक कृषि अभियान को गति प्रदान करना, कम लागत में गुणवत्तायुक्त एवं अधिक उत्पादन के लिए सतत एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों की प्रायोगिक एवं सैद्धांतिक समझ विकसित करना तथा ब्लॉक स्तर पर कृषि प्रबंधन को समझने वाले युवाओं को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित करना रहा। इसके माध्यम से प्रशिक्षित युवा स्वयं के साथ-साथ अपने क्षेत्र के किसानों को भी लाभान्वित कर सकेंगे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन श्री पवन टॉक, मुख्य वैज्ञानिक, श्री रामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, कोटा के प्रमुख मार्गदर्शन में किया गया। विभिन्न सत्रों में वैज्ञानिकों द्वारा प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। आरसीएम के संस्थापक एवं चेयरमैन श्री त्रिलोचन छाबड़ा सभी प्रशिक्षण सत्रों में उपस्थित रहे तथा समय-समय पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करते रहे।